जमुई पीड़िता की तस्वीर को लेकर मीसा भारती पहुंचीं सचिवालय थाना, सीएम के खिलाफ FIR की मांग
पटना, अजीत: जमुई में नाबालिग से बदसलूकी के मामले को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया हैंडल से पीड़िता और उसके परिवार के साथ तस्वीर साझा किए जाने पर विवाद बढ़ गया है। पोस्ट बाद में हटा दी गई। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि तस्वीर के जरिए नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ।
इसी मामले को लेकर पाटलिपुत्र की राजद सांसद डॉ. मीसा भारती शुक्रवार को सचिवालय थाना पहुंचीं और मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। मीसा भारती ने दावा किया कि वह पॉक्सो अधिनियम की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 के तहत कार्रवाई की मांग करने पहुंची थीं। उनके अनुसार, थाना प्रभारी ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की।
मीसा भारती ने आरोप लगाया कि नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना कानून के तहत गंभीर मामला है। उन्होंने बिहार पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया और कहा कि जमुई मामले से जुड़े वीडियो या सामग्री साझा करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से पुलिस पीछे हट रही है। यह बयान मीसा भारती का आरोप है।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्ट से पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ और पॉक्सो कानून के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।
दरअसल, जमुई मामले की नाबालिग पीड़िता अपने परिवार के साथ मुख्यमंत्री से मिली थी। अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने परिवार को जल्द न्याय का भरोसा दिया था। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के एक्स हैंडल से परिवार के साथ तस्वीर और न्याय से जुड़ा संदेश पोस्ट किया गया, जिसे बाद में हटा दिया गया।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी सामने आया है कि सचिवालय थाने में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ तस्वीर पोस्ट किए जाने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज होने की रिपोर्ट है। ऐसे में अब मामले की पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।



