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एक करोड़ वृक्ष लगाने का अभियान शुरू, संपतचक में लगाया गया दुर्लभ मियाजाकी आम का पौधा

फुलवारी शरीफ, अजीत:
पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ वातावरण और हरित भारत के निर्माण के उद्देश्य से प्रेमालोक शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास संस्थान द्वारा देशव्यापी एक करोड़ वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत बुधवार को पटना के संपतचक स्थित आरुणीधाम परिसर से की गई. अभियान के प्रथम चरण में विश्व के सबसे महंगे फलों में शामिल मियाजाकी प्रजाति के आम का पौधा लगाया गया.
कार्यक्रम का आयोजन संस्थान द्वारा संचालित आरुणीधाम परिसर में किया गया, जहां पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए व्यापक वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ हुआ. इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या डॉ. साधना कुमारी शर्मा, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की छात्रा सृष्टि वर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. सृष्टि वर्मा प्रेमालोक शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास संस्थान में पर्यावरण विषय पर इंटर्नशिप कर रही है.

प्रेमालोक शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास संस्थान के संस्थापक, प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं शिक्षाविद गुरुदेव श्री प्रेम ने कहा कि देश में बढ़ती आबादी, घटते वन क्षेत्र और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए बड़े स्तर पर वृक्षारोपण की आवश्यकता है. इसी उद्देश्य से पूरे देश में एक करोड़ आम सहित विभिन्न फलदार एवं छायादार वृक्ष लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. उन्होंने बताया कि अभियान की शुरुआत बिहार से हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में इसे हरियाणा के मुरथल, दिल्ली-एनसीआर सहित देश के विभिन्न राज्यों और जिलों तक पहुंचाया जाएगा.
उन्होंने कहा कि संस्थान की टीम देश के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास करेगी. बड़े स्कूलों, अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, कॉलेज परिसरों और सार्वजनिक स्थलों पर वृक्षारोपण कर हरित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में कार्य किया जाएगा.
गुरुदेव श्री प्रेम ने कहा कि बिहार का कुल वन क्षेत्र राष्ट्रीय मानकों की तुलना में अभी भी कम है. भारत में वन एवं वृक्ष आवरण लगभग 25 प्रतिशत के आसपास है, जबकि बिहार में वन क्षेत्र करीब सात से आठ प्रतिशत के बीच है. इसके विपरीत झारखंड में वन क्षेत्र लगभग 29 से 30 प्रतिशत तक है. ऐसे में बिहार में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यदि अभी से प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना चुनौती बन जाएगा.
उन्होंने कहा कि प्रेमालोक मिशन स्कूल में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया जाता है. बच्चों को नियमित रूप से पौधरोपण, जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है ताकि वे भविष्य में प्रकृति के प्रति जिम्मेदार नागरिक बन सकें.
कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल होने के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की छात्रा सृष्टि वर्मा पटना पहुंचीं. वह संस्थान में 14 दिवसीय इंटर्नशिप एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत पर्यावरण संरक्षण विषय पर अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं. सृष्टि वर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज पूरे विश्व की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है. यदि बिहार और पटना हरा-भरा रहेगा तो इसका सकारात्मक संदेश पूरे देश में जाएगा.
उन्होंने कहा कि उनका सपना हरित भारत का निर्माण है, जहां प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे. बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के माध्यम से ही स्वच्छ हवा, शुद्ध वातावरण और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है. उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल करने का आह्वान किया.
सृष्टि वर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को उन्होंने अपने प्रशिक्षण का प्रमुख विषय चुना है. उनका उद्देश्य लोगों को वृक्षारोपण के प्रति प्रेरित करना और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे तो देश में हरित क्रांति लाई जा सकती है.
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने तथा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रण लिया. संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पौधों के संरक्षण और उन्हें विकसित करने की जिम्मेदारी भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी. पूरे देश में चलने वाले इस महाअभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने का लक्ष्य रखा गया है.

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