मैट्रिक प्रोत्साहन राशि के चेक के बदले रिश्वत लेने वाले प्रभारी प्रधानाध्यापक को 3-3 वर्ष की सजा
पटना/फुलवारी। विशेष न्यायाधीश (निगरानी) पटना अतुल कुमार सिंह ने भ्रष्टाचार के एक चर्चित मामले में तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक उपेन्द्र शर्मा को दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह निर्णय निगरानी थाना कांड संख्या 44/2013 से संबंधित विशेष वाद संख्या 49/2013 में सुनाया गया।
न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 तथा धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(d) के तहत प्रत्येक आरोप में तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10-10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
विशेष लोक अभियोजक (ट्रैप) विजय भानु उर्फ पुट्टू बाबू ने बताया कि उपेन्द्र शर्मा, जो उस समय दमोदर उच्च विद्यालय, रघुनाथपुर (पालीगंज) में प्रभारी प्रधानाध्यापक थे, ने मैट्रिक परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण छात्रा गौरवी रंजन को मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाले 10 हजार रुपये के चेक के बदले 2,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने पर 24 जुलाई 2013 को निगरानी की ट्रैप टीम ने पटना के ए.एन. कॉलेज रोड स्थित गैसोलीन पेट्रोल पंप के समीप जाल बिछाकर उपेन्द्र शर्मा को रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 10 गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए भ्रष्टाचार के मामले में तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास तथा जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला सरकारी योजनाओं में रिश्वतखोरी के मामलों में सख्त कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।



