विश्व की सबसे बड़ी अर्धनारीश्वर प्रतिमा के प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का शुभारंभ
11 हजार कलशों के साथ निकली भव्य कलश यात्रा.
20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, 25 जून तक चलेगा 1008 कुंडीय महायज्ञ, 26 जून को होगा प्राण प्रतिष्ठा समारोह.
फुलवारी शरीफ, अजीत:
गौरीचक थाना क्षेत्र के चंडासी गांव में निर्मित विश्व की सबसे बड़ी 108 फीट ऊंची अर्धनारीश्वर प्रतिमा एवं भव्य मंदिर परिसर में मंगलवार को प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ. श्रद्धा, आस्था और उत्साह से सराबोर इस ऐतिहासिक आयोजन में संपतचक, गौरीचक, पुनपुन, फतुहा समेत आसपास के सैकड़ों गांवों से पहुंचे 20 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए. लगभग 11 हजार महिलाओं, युवतियों और कन्याओं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा में भाग लिया.

कलश यात्रा मंदिर परिसर से शुरू होकर करीब छह किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पुनपुन नदी तट पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलशों में जल भरा गया. इसके बाद श्रद्धालु पुनः मंदिर परिसर लौटे, जहां धार्मिक अनुष्ठानों की विधिवत शुरुआत हुई. यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई. हाथी, घोड़े, बैंड-बाजे, धार्मिक झांकियां, भजन-कीर्तन और शिव भक्ति गीतों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया. “हर-हर महादेव”, “जय भोलेनाथ”, “जय अर्धनारीश्वर” और “जय गणेश” के जयकारों से पूरा इलाका गूंजता रहा.
भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी. बड़ी संख्या में श्रद्धालु नंगे पांव कलश यात्रा में शामिल हुए. श्रद्धालुओं को राहत पहुंचाने के लिए आयोजन समिति एवं स्थानीय लोगों की ओर से पूरे मार्ग पर पानी का छिड़काव कराया गया. जगह-जगह शरबत, पेयजल और जलपान की व्यवस्था की गई थी. मंदिर परिसर पहुंचने पर श्रद्धालुओं को प्रसाद एवं भोजन भी उपलब्ध कराया गया.
करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस भव्य धार्मिक परिसर का निर्माण कई वर्षों की सतत मेहनत और जनसहयोग से पूरा हुआ है. मंदिर निर्माण में बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत विभिन्न राज्यों के अनुभवी कारीगरों एवं शिल्पकारों ने योगदान दिया है. भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप अर्धनारीश्वर की 108 फीट ऊंची प्रतिमा के अलावा परिसर में भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की विशाल प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं. आधार सहित प्रतिमा की कुल ऊंचाई लगभग 143 फीट बताई जा रही है, जो इसे देश ही नहीं बल्कि विश्व की सबसे बड़ी अर्धनारीश्वर प्रतिमा बनाती है.
मंदिर परिसर में 17 जून से 25 जून तक 1008 हवन कुंडों में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा. इस महायज्ञ में देश के विभिन्न तीर्थस्थलों और धार्मिक संस्थानों से पहुंचे करीब एक हजार विद्वान ब्राह्मण एवं आचार्य शामिल हो रहे हैं. इनमें सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश से आए वैदिक विद्वानों की है. पूरे यज्ञ परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला लगातार जारी रहेगा.
आयोजन को सफल बनाने में हर-हर महादेव टीम के सदस्य दिन-रात जुटे हुए हैं. टीम के सदस्य श्रद्धालुओं की सेवा, यज्ञशाला की व्यवस्था, भोजन, आवास, पेयजल, यातायात संचालन और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. आयोजन स्थल पर हर-हर महादेव के जयघोष के साथ स्वयंसेवक लगातार सेवा कार्य में लगे हुए हैं.
आयोजन समिति के प्रमुख एवं समाजसेवी शत्रुंजय कुमार सिंह उर्फ सातों सिंह मुखिया ने बताया कि यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि सामाजिक समरसता, जनसहभागिता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक भी है. श्रद्धालुओं के सहयोग और दान से तैयार यह परियोजना आने वाले दिनों में बिहार के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में शामिल होगी.
कलश यात्रा और महायज्ञ को लेकर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे. गौरीचक थानाध्यक्ष सुमन कुमार, अपर थानाध्यक्ष रवि कुमार सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल पूरे मार्ग पर तैनात रहा. पुलिस प्रशासन लगातार कलश यात्रा के साथ मौजूद रहा और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा. मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में विशेष निगरानी की गई ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
आयोजन समिति के अनुसार 26 जून को वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के बीच अर्धनारीश्वर, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय सहित मंदिर परिसर में स्थापित सभी प्रतिमाओं का भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जाएगा. इस अवसर पर देशभर से संत-महात्माओं, धर्माचार्यों और हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.



