हरे कृष्ण-हरे राम के जयघोष से गूंज रहा कथा परिसर, रुक्मिणी-कृष्ण विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर
पटना से अजीत कुमार की रिपोर्ट
राजधानी पटना के पूर्वी आशोचक मोहल्ला में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनी हुई है. कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर रहे हैं. हरे कृष्ण, हरे राम के गगनभेदी जयघोष और भजनों की मधुर धुन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है.
प्रख्यात कथावाचक पंडित सतीशकांत शास्त्री के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही श्रीमद् भागवत कथा का रसपान करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूब जाते हैं. कथा समाप्ति के बाद भी भक्तों के चेहरे पर आध्यात्मिक आनंद और संतोष स्पष्ट दिखाई देता है.
सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया गया. कथावाचक ने बताया कि रुक्मिणी जी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने मन, वचन और कर्म से पति रूप में स्वीकार किया था. जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से कराने का प्रयास किया तो रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपनी व्यथा सुनाई. इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी हरण कर उनका विवाह संपन्न कराया. इस प्रसंग के वर्णन के दौरान कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे और “राधे-राधे”, “हरे कृष्ण-हरे राम” तथा “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा.
रुक्मिणी विवाह प्रसंग के दौरान भजन-कीर्तन और मंगल गीतों ने भक्ति के माहौल में चार चांद लगा दिए. महिलाओं ने श्रद्धा के साथ मंगल गीत गाए जबकि श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए. ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कथा स्थल स्वयं द्वारिका नगरी में परिवर्तित हो गया हो.
पंडित सतीशकांत शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत पुराण भगवान श्रीकृष्ण का साहित्यिक स्वरूप है. इसके श्रवण मात्र से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है. भागवत कथा मनुष्य को धर्म, भक्ति, प्रेम, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है.
ज्ञात हो कि तीन जून को आशोचक गांव स्थित देवी स्थान से भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई थी. बैण्ड-बाजे, हाथी-घोड़े और धार्मिक जयघोषों के साथ निकली यह शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए गोल्डेन रिसोर्ट स्थित कथा स्थल तक पहुंची थी. यात्रा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म के प्रति अपनी आस्था प्रकट की थी.
आयोजन को सफल बनाने में पूर्वी आशोचक, आशोचक और जकरियापुर के ग्रामीण तथा श्रद्धालु पूरी निष्ठा के साथ जुटे हुए हैं. आयोजकों ने बताया कि कथा के समापन अवसर पर बुधवार को महाप्रसाद वितरण किया जाएगा. इसके लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.
पूरे क्षेत्र में इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. कथा स्थल पर पहुंचने वाला प्रत्येक श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सराबोर होकर लौट रहा है.।



