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रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ी गई तत्कालीन महिला दारोगा को तीन वर्ष की सजा

पटना से अजीत कुमार की रिपोर्ट

विशेष निगरानी इकाई थाना के मामले में पहली सजा

फुलवारी शरीफ, अजीत:

रिश्वतखोरी के एक मामले में विशेष निगरानी न्यायालय, पटना ने हाजीपुर नगर थाना की तत्कालीन पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) पूनम कुमारी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है.यह सजा विशेष निगरानी इकाई थाना के मामले में पहली सजा मिला है.सजा के अलावा न्यायालय ने उन पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. अर्थदंड जमा नहीं करने पर तीन माह की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी.

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विशेष न्यायाधीश (निगरानी) अतुल कुमार सिंह की अदालत ने विशेष वाद संख्या-17/2024 में यह फैसला सुनाया. यह मामला विशेष निगरानी इकाई थाना कांड संख्या-06/2024 से संबंधित है.

अभियोजन के अनुसार, घटना के समय पूनम कुमारी हाजीपुर नगर थाना में पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर तैनात थीं. आरोप है कि उन्होंने नितेश बस सर्विस के प्रबंधक पंकज कुमार द्विवेदी से उनकी बस संख्या BR-31P-5778 को मुक्त कराने के लिए जिला परिवहन पदाधिकारी को अनुशंसा भेजने के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी.

शिकायत मिलने के बाद विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने मामले का सत्यापन कराया. जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद 14 नवंबर 2024 को ट्रैप कार्रवाई की गई. कार्रवाई के दौरान हाजीपुर स्थित उनके आवास पर शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया. ट्रैप के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद की गई थी.

गिरफ्तारी के बाद से अभियुक्ता न्यायिक हिरासत में हैं. मामले के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाहों की गवाही कराई गई तथा न्यायालय के समक्ष आवश्यक दस्तावेजी एवं अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए गए.

अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (ट्रैप केस) विजय भानु उर्फ पुट्टू बाबू ने प्रभावी पैरवी की. प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने पूनम कुमारी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई.

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