एम्स में नौकरी दिलाने के नाम पर ढाई लाख रुपये मांगने का आरोप, सांसद की अनुशंसा पत्र फाड़ने और मारपीट की शिकायत
पटना के फुलवारी शरीफ स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। एक युवक ने नौकरी दिलाने के नाम पर ढाई लाख रुपये मांगने, सांसद की अनुशंसा पत्र और नौकरी से संबंधित आवेदन फाड़ने, जातिसूचक गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाया है।
मामले को लेकर रतन कुमार रजक ने फुलवारी शरीफ थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, रतन कुमार रजक एम्स में बाहरी सेवा प्रदाता कंपनी संपूर्णा के माध्यम से माली के पद पर नौकरी पाने का प्रयास कर रहे थे। इसी सिलसिले में भागलपुर के लोकसभा सांसद अजय कुमार मंडल की ओर से एम्स निदेशक के नाम 19 अगस्त 2026 को अनुशंसा पत्र जारी किया गया था।
रतन कुमार रजक का आरोप है कि 11 सितंबर की शाम करीब साढ़े छह बजे वह नौकरी से संबंधित कागजात और सांसद की अनुशंसा लेकर एम्स पहुंचे थे। इसी दौरान कार्यालय से जुड़े एक व्यक्ति ने बातचीत के बहाने उन्हें आवासीय क्षेत्र स्थित देवी मंदिर के पास बुलाया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, वहां उनके हाथ से सांसद की अनुशंसा पत्र और आवेदन छीनकर फाड़ दिया गया। इसके बाद नौकरी दिलाने के बदले ढाई लाख रुपये की मांग की गई। रकम नहीं देने पर नौकरी नहीं लगने देने की धमकी देने का भी आरोप है।
विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने घटना की शिकायत करने पर धमकी देने की बात भी कही है।
रतन कुमार रजक ने पुलिस के अलावा अनुसूचित जाति एवं जनजाति थाना और वरीय पुलिस अधिकारियों को भी शिकायत की प्रतिलिपि देने की बात कही है।
वहीं, फुलवारी शरीफ थानाध्यक्ष गुलाम शाहबाज आलम ने बताया कि नौकरी के नाम पर रुपये मांगने, सांसद की अनुशंसा पत्र फाड़ने और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल समेत अन्य आरोपों से संबंधित लिखित शिकायत मिली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जांच के बाद वरीय अधिकारियों से विमर्श कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी तरफ, एम्स प्रशासन ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को गलत और निराधार बताया है। एम्स के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि सांसद की अनुशंसा पत्र फाड़े जाने की बात सही नहीं है और संबंधित पत्र कार्यालय में सुरक्षित है।
हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स प्रशासन ने जांच समिति गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराने की बात कही है। प्रशासन के अनुसार, जांच में यदि किसी कर्मचारी की संलिप्तता या लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब इस मामले में पुलिस और एम्स की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फुलवारी से अजीत कि रिपोर्ट



