वैश्य समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर, राष्ट्रीय वैश्य चेतना महासभा की बैठक आयोजित
फुलवारी शरीफ, बिहार की राजधानी पटना के हनुमान नगर स्थित स्टेट बैंक के सामने उज्ज्वल पैलेस प्रांगण में राष्ट्रीय वैश्य चेतना महासभा के क्रियाशील कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नंदकिशोर पोद्दार ने की, जबकि मंच संचालन डॉ. अनिल कुमार अनल ने किया। कार्यक्रम में संगठन के राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.
मुख्य अतिथि महासभा के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. राजकुमार आजाद ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीति का अर्थ राजा की नीति होता है तथा इसकी उत्पत्ति राजा से हुई है। उन्होंने कहा कि देश में वैश्य समाज के नाम पर अनेक संगठन कार्य कर रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय वैश्य चेतना महासभा वैश्य समाज को नेतृत्वकारी भूमिका में स्थापित करने के उद्देश्य से कार्यरत है.
मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय संरक्षक मथुरा बाबू ने कहा कि वैश्य समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए संगठन लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से समाज में जागरूकता बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया.
विशिष्ट अतिथियों में सहदेव साह, शीतल गुप्ता, धर्मेंद्र गुप्ता, डॉ. रतन गांधी, सत्यनारायण साहू सहित अन्य नेताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने समाज की एकता, संगठन की मजबूती तथा राजनीतिक सहभागिता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया.
राष्ट्रीय महासचिव शिव कुमार स्पंदन ने कहा कि संगठन का उद्देश्य वैश्य समाज को संगठित कर सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक क्षेत्रों में उसकी भूमिका को सशक्त बनाना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और शहर-शहर जाकर समाज को जागरूक करने का आह्वान किया.
राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व डिप्टी कलेक्टर आदित्य शिवमशंकर गुप्ता ने कहा कि वैश्य समाज को उसकी जनसंख्या और योगदान के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने समाज के लोगों से संगठित होकर अपने अधिकारों और हितों के लिए कार्य करने का आग्रह किया.
कार्यक्रम के दौरान बिहार प्रदेश इकाई के पदाधिकारियों ने सभी आगंतुक अतिथियों को चादर ओढ़ाकर सम्मानित किया। बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने वैश्य समाज को संगठित एवं सशक्त बनाने के संकल्प का समर्थन करते हुए हाथ उठाकर अपनी स्वीकृति प्रदान की.
बैठक के अंत में संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान तथा आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक जागरूकता, शिक्षा, संगठन और राजनीतिक सहभागिता के माध्यम से समाज को आगे बढ़ाने के लिए महासभा निरंतर कार्य करती रहेगी.



