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बिजली विभाग के मानव बल की संदिग्ध मौत पर फूटा गुस्सा, बेऊर मोड़ जाम

हत्या का आरोप लगाकर परिजनों ने की हत्यारों की गिरफ्तारी, फांसी, मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग.

पटना । राजधानी पटना के जक्कनपुर स्थित बिजली विभाग के सरकारी आवास परिसर में मासूम बच्चे की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद बिजली विभाग में मानव बल के रूप में कार्यरत अनुराग राज की संदिग्ध मौत को लेकर गुरुवार को परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. बेऊर थाना क्षेत्र के विशुनपुर पकड़ी निवासी अनुराग राज के परिजनों ने बेऊर मोड़ पर करीब तीन घंटे तक सड़क जाम कर आगजनी, नारेबाजी और प्रदर्शन किया. इसके बाद बेऊर थाना का घेराव भी किया. प्रदर्शनकारियों ने हत्या का आरोप लगाते हुए दोषियों की गिरफ्तारी, फांसी की सजा, पीड़ित परिवार को मुआवजा तथा अनुराग की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की.

सड़क जाम के कारण अनीसाबाद, फुलवारीशरीफ, पटना-गया मार्ग, न्यू बाइपास और बेऊर मोड़ से पूरब की ओर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया. हजारों छोटे-बड़े वाहन घंटों फंसे रहे और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

जानकारी के अनुसार, बुधवार की रात जक्कनपुर थाना क्षेत्र स्थित बिजली विभाग की कॉलोनी में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की चपेट में आने से तीन वर्षीय काव्यांश राज की मौत हो गई थी. काव्यांश बिजली विभाग के कनीय अभियंता मंजीत कुमार का पुत्र था और सरकारी आवास परिसर में खेल रहा था. बताया जा रहा है कि स्कॉर्पियो अनुराग राज चला रहे थे, जो बिजली विभाग में मानव बल के रूप में कार्यरत थे और कथित रूप से सहायक अभियंता अशोक कुमार सिन्हा के निजी चालक के रूप में भी काम कर रहे थे.

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बच्चे की मौत के बाद अनुराग राज की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि दुर्घटना के बाद अनुराग को गार्ड रूम में बंद कर उसके साथ मारपीट की गई और बाद में उसकी हत्या कर शव को फंदे से लटका दिया गया. वहीं कुछ लोगों द्वारा आत्महत्या की भी आशंका जताई जा रही है. पुलिस ने अभी किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

जक्कनपुर थाना में अनुराग की पत्नी स्नेहा के बयान पर बिजली विभाग के एसडीओ अशोक कुमार सिन्हा एवं अन्य के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज किया गया है. वहीं मासूम काव्यांश की मौत के मामले में उसके पिता मंजीत कुमार के बयान पर ट्रैफिक थाना में अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है.

अनुराग की पत्नी स्नेहा ने आरोप लगाया कि घटना वाले दिन एसडीओ अशोक कुमार सिन्हा ने फोन कर उनके पति को आवास पर बुलाया था. बाद में सूचना मिली कि उनकी हत्या कर दी गई है. परिजनों का दावा है कि अनुराग ने मौत से पहले अपने एक दोस्त को फोन कर कहा था कि “ये लोग मेरी हत्या कर देंगे.” उनका आरोप है कि पुलिस के पहुंचने के बावजूद गार्ड रूम का ताला समय पर नहीं खोला गया और बाद में अंदर अनुराग का शव गमछे के फंदे से लटका मिला.

सदर डीएसपी रंजन कुमार सिंह ने बताया कि दोनों मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है. एफएसएल की टीम ने घटनास्थल की जांच की है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है. जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.

इधर, अनुराग के सहकर्मियों ने भी आरोप लगाया कि उनसे निर्धारित समय से अधिक ड्यूटी कराई जाती थी तथा कभी चालक तो कभी निजी कार्य भी कराया जाता था. नौकरी जाने के डर से वह अतिरिक्त काम करने को मजबूर थे. अनुराग की तीन वर्ष पूर्व शादी हुई थी और उनकी डेढ़ वर्ष की एक बेटी है. परिवार का वह एकमात्र कमाने वाला सदस्य था. घटना के बाद पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है.

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