बिहार के किसान जागरूक और सक्षम हैं, उनकी क्षमता को निखारने की जरूरत: डॉ. इन्द्रजीत
फुलवारी शरीफ.अजीत. किसान, किसान से ही अधिक सीखता है क्योंकि वह चीजों को प्रत्यक्ष तौर पर अपने आसपास होता देखता है. इसलिए जो भी ज्ञान किसानों को संवाद या प्रशिक्षण में मिलता है, उन्हें चाहिए कि जाकर उसे दूसरे किसानों तक पहुँचाएँ. उक्त बातें बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने कही. वे गुरुवार को विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित कृषक-वैज्ञानिक संवाद के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे.
उन्होंने आगे कहा कि पशुपालक पहले सस्ती व्यवस्था अपनाएँ और फिर धीरे-धीरे सुधार करते हुए आगे बढ़ें. बिहार के किसान जागरूक और सक्षम हैं, बस उनकी क्षमता को निखारने की जरूरत है. विश्वविद्यालय का कर्तव्य है कि वह किसानों को ज्ञान और उचित मार्गदर्शन देकर उन्नति की राह दिखाए।

कुलपति ने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे किसानों की अधिक से अधिक मदद करें, क्योंकि जब किसान खुश होगा और बदले में सम्मान देगा तो वह एक सुखद अनुभूति होगी. नस्ल सुधार पर उन्होंने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान (ए.आई.) ने देश में नई क्रांति लाई है. फ्रोजेन सीमेन पशुपालन के उत्थान में सहायक सिद्ध हुआ है और विगत दशकों में इसकी गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है. इसलिए पशुपालक भ्रूण प्रत्यारोपण (ई.टी.टी.) और आई.वी.एफ. जैसी नवीनतम तकनीकों को अपनाएँ और उन्नत नस्ल से अपनी क्षमता को बढ़ाएँ.
विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित इस कृषक-वैज्ञानिक संवाद की शुरुआत निदेशक डॉ. निर्मल सिंह दहिया के स्वागत भाषण से हुई. उन्होंने कहा कि बिहार पशुपालन में बेहतर कर रहा है और यदि पशुपालकों को सही मार्गदर्शन मिले तो राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी बन सकता है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राज्य के पशुपालकों के हित में निरंतर कार्य कर रहा है और राज्य के अंतिम छोर तक अपनी सेवाएँ प्रदान करेगा

उन्होंने ब्रीडिंग के महत्व पर प्रकाश डाला और पशुपालकों से अच्छे नस्ल के पशु को रखने की अपील की. साथ ही पशुपालन में महिलाओं के योगदान की सराहना की.
कार्यक्रम में वैशाली, भोजपुर, सिवान, पटना, बेगूसराय, बक्सर, मुजफ्फरपुर और मधुबनी से आए 34 प्रगतिशील डेयरी किसानों ने भाग लिया. संवाद में डॉ. जे.पी. गुप्ता, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, डॉ. रवि रंजन कुमार सिन्हा और डॉ. कौशलेन्द्र कुमार ने प्रजनन तकनीक, हरे चारे का प्रबंधन, खनिज मिश्रण का लाभ, डेयरी उद्योग में रिकॉर्ड रखना और आहार में विषाक्त तत्वों से बचाव जैसे विषयों पर व्याख्यान दिया.



