फॉरेंसिक मेडिसिन डे पर एम्स पटना मे एआर टी पर पुस्तक का हुआ विमोचन
फुलवारी शरीफ, अजीत: एम्स पटना के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग द्वारा फॉरेंसिक मेडिसिन डे के अवसर पर “न्याय व्यवस्था में बहु-विषयक एवं समन्वित दृष्टिकोण” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान “मेडिकोलीगल अपडेट्स ऑन असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी : इंडियन पर्सपेक्टिव” पुस्तक का विमोचन किया गया.
इस पुस्तक के लेखक फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. बिनय कुमार, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. इंदिरा प्रसाद तथा क्लिनिकल एवं इंटरवेंशनल फिजियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. त्रिभुवन कुमार हैं.
पुस्तक का विमोचन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने बिहार पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध) पारस नाथ की उपस्थिति में किया. इस अवसर पर डीन रिसर्च प्रो. संजय पांडेय, डीन स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. रुचि सिन्हा, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. अनुप कुमार तथा फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. अमित पाटिल भी मौजूद रहे.
पुस्तक में सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) से जुड़े कानूनी, नैतिक और नियामकीय पहलुओं को भारतीय संदर्भ में विस्तार से बताया गया है. इसमें एआरटी क्लिनिक की स्थापना एवं संचालन से संबंधित कानूनी प्रावधानों के साथ तकनीक के मूल सिद्धांत और प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी गई है.
यह पुस्तक स्त्री रोग विशेषज्ञों, फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञों, विधि विशेषज्ञों तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी संदर्भ पुस्तक मानी जा रही है.
इसके साथ ही एम्स पटना के डॉक्टरों द्वारा कृत्रिम गर्भाधान तकनीक और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर आधारित इस पुस्तक का प्रकाशन रेड फ्लावर पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है. पुस्तक का हिंदी नाम “सहायक प्रजनन तकनीक पर विधिक एवं चिकित्सकीय अद्यतन : भारतीय परिप्रेक्ष्य” है.
डॉ. बिनय कुमार को मेडिकोलीगल मामलों और मेडिकल कानून का लंबा अनुभव है. वहीं डॉ. इंदिरा प्रसाद आईवीएफ और महिलाओं की जटिल बीमारियों की विशेषज्ञ हैं. डॉ. त्रिभुवन कुमार पुरुष बांझपन और जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर लंबे समय से शोध कर रहे हैं.
इस पुस्तक में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक, आईवीएफ, सरोगेसी, मेडिकल कानून, मरीजों के अधिकार और डॉक्टरों की जिम्मेदारियों जैसे विषयों को सरल भाषा में समझाया गया है. पुस्तक मेडिकल छात्रों, डॉक्टरों, कानून के विद्यार्थियों और आम लोगों के लिए भी उपयोगी मानी जा रही है.



