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पटना में राष्ट्रीय फोरेंसिक मेडिसिन दिवस पर विज्ञान और न्याय का संगम

फुलवारी शरीफ, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना के फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग द्वारा मंगलवार को राष्ट्रीय फोरेंसिक मेडिसिन दिवस के अवसर पर भव्य सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. “न्याय व्यवस्था में बहु-विषयक एवं समन्वित दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में चिकित्सा विज्ञान, फोरेंसिक विशेषज्ञता और न्याय व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा हुई.
कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अमित एम. पाटिल के स्वागत संबोधन से हुई. उन्होंने कहा कि फोरेंसिक मेडिसिन स्वास्थ्य व्यवस्था का ऐसा महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो मृत्यु के बाद भी समाज को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाता है. उन्होंने पोस्टमार्टम, क्लिनिकल फोरेंसिक जांच, विशेषज्ञ चिकित्सीय राय और शवगृह सेवाओं के माध्यम से विभाग की भूमिका को रेखांकित किया.
कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग पारस नाथ सिंह तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी प्रो. ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस अवसर पर डीन शोध प्रो. डॉ. संजय पांडेय, डीन छात्र कल्याण प्रो. डॉ. रुचि सिन्हा, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. अनुप कुमार सहित कई वरिष्ठ फोरेंसिक विशेषज्ञ मौजूद रहे.
प्रो. ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि फोरेंसिक मेडिसिन केवल वैज्ञानिक जांच नहीं बल्कि सत्य तक पहुंचने का सबसे विश्वसनीय माध्यम है. उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में फोरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है.
मुख्य अतिथि पारस नाथ सिंह ने आधुनिक अपराध अनुसंधान में तकनीक की भूमिका पर जोर देते हुए मेडिको लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग सिस्टम के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही. उन्होंने कहा कि डिजिटल पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग से न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक बनेगी.
कार्यक्रम के दौरान प्रो. डॉ. बिनय कुमार, डॉ. इंदिरा प्रसाद और प्रो. डॉ. त्रिभुवन कुमार द्वारा लिखित पुस्तक “मेडिकोलीगल आस्पेक्ट्स ऑफ असिस्टेड रीप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी : इंडियन पर्सपेक्टिव” का भी लोकार्पण किया गया. विशेषज्ञों ने इसे आधुनिक चिकित्सा न्यायशास्त्र से जुड़ी महत्वपूर्ण पुस्तक बताया.
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान देवघर के प्रो. डॉ. निशात अहमद शेख तथा सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश किशोर प्रसाद ने न्यायालय में विशेषज्ञ गवाही, अदालत की प्रक्रिया और पेशेवर आचरण पर विस्तृत जानकारी दी.
फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला पटना के निदेशक हिमजय कुमार ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और नमूना संग्रहण की महत्ता पर प्रकाश डाला. वहीं नगर पुलिस अधीक्षक पश्चिम भानु प्रताप सिंह ने ई-साक्ष्य पोर्टल और अपराध स्थल जांच की आधुनिक तकनीकों पर प्रस्तुति दी.
डॉ. चैतन्य मित्तल द्वारा पोस्टमार्टम प्रक्रिया का वीडियो प्रदर्शन भी किया गया, जिससे प्रतिभागियों को फोरेंसिक जांच की वैज्ञानिक बारीकियों की जानकारी मिली. इसके बाद आयोजित परिचर्चा में पुलिस अधिकारियों, फोरेंसिक वैज्ञानिकों और मेडिकल रेजिडेंट चिकित्सकों ने न्याय व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के सुझाव साझा किए.
कार्यक्रम का समापन विज्ञान, चिकित्सा और कानून के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने तथा पारदर्शी और संवेदनशील न्याय व्यवस्था विकसित करने के संकल्प के साथ हुआ.

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