गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का आशीर्वाद का क्या है महत्व
सुदीप सोनी कि रिपोर्ट
खगौल। गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। यह आषाढ़ माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है और इसे वेद व्यास के जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है, जिन्होंने वेदों और पुराणों की रचना की। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं का सम्मान करते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं और उनके द्वारा दिए गए ज्ञान के लिए आभार व्यक्त करते हैं। इस बार गुरु पूर्णिमा 10जुलाई को है।

गुरु पूर्णिमा पर आशीर्वाद लेना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है इस दिन गुरु के दिए हुए आशीर्वाद और दीक्षा से प्राणी के जीवन सुलभ हो जाता है और वह अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है।

वैसे तो पूरे भारतवर्ष में गुरु पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा क दिन भक्त अपने गुरु के पास जाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। हम आपको आज एक ऐसे गुरु के बारे जानकारी देंगे जिनका आशीर्वाद कभी भी व्यर्थ नहीं जाता है।

जी हां बात कर रहे है खगौल के नेउर कलोनी कॉलोनी स्थित योगेश्वर नाथ शिव मंदिर मे रहने वाले बाबा शत्रुघ्नदास जी महाराज के संबंध मे। कहां जाता है कि बाबा शत्रुघ्नदास जी महाराज भगवान शिव के परम प्रिय भक्तों में से जाने जाते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन बाबा शत्रुघ्नदास जी के दर्शन करने के लिए भक्तों की लाइन लगी रहती है।

वही बाबा शत्रुघ्न दास जी महाराज अपने भक्तों को जो भी आशीर्वाद देते हैं वह फलित होता है उनके आशीर्वाद मात्र से ही भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। बड़े-बड़े नेता और अभिनेता मंदिर के आशीर्वाद से अपने लक्ष्य को बहुत आसानी से प्राप्त किए है। वैसे मे इस मंदिर का गुरु पूर्णिमा के दिन बड़ा महत्व है। इसी मंदिर में पंडित विजय बाबा भी रहते हैं जो लोकजनशक्ति पार्टी रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान के गुरु भी है।

चिराग पासवान ने खुद माना है कि नेउरा कॉलोनी स्थित योगेश्वर नाथ शिव मंदिर मे विराजमान भगवान शिव एवं विजय बाबा के आशीर्वाद से वह अपनी खोई हुई पुरानी विरासत हासिल कर पाए है।

कहा जाता है कि बाबा योगेश्वर नाथ के मंदिर में सक्षात भगवान शिव विराजमान है, एक यह भी कारण है कि इस मंदिर से मिला हुआ आशीर्वाद कभी खाली नहीं जाता। वही गुरु पूर्णिमा आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सलाह के महत्व को भी दर्शाता है. इस दिन, शिष्य अपने गुरुओं को दक्षिणा देते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते है।



