जमीन रजिस्ट्री रोक के फैसले पर पुनर्विचार करे सरकार, प्रभावित इलाकों में बढ़ी बेचैनी
बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा ग्रीनफील्ड सैटलाइट टाउनशिप परियोजना के तहत पटना जिले के कई प्रखंडों में जमीन की खरीद-बिक्री, निबंधन और निर्माण कार्यों पर लगाई गई रोक को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. इस फैसले के खिलाफ अब जनप्रतिनिधियों ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है.
जानकारी के अनुसार, पुनपुन, धनरूआ, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक और दनियावां प्रखंडों के 215 राजस्व ग्रामों को कोर एरिया और स्पेशल एरिया के रूप में चिन्हित करते हुए सरकार ने जमीन से जुड़े सभी प्रकार के लेन-देन और विकास कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. इस निर्णय का व्यापक असर स्थानीय आबादी पर पड़ा है.
इस मुद्दे को लेकर संपतचक जदयू अध्यक्ष रंजीत कुमार टप्पु ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने कहा है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और प्रभावित लोगों के लिए ठोस समाधान निकालना चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार अपनी जरूरतों के लिए जमीन की खरीद-बिक्री पर निर्भर रहते हैं. बच्चों की पढ़ाई, शादी, इलाज और घर निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य जमीन बेचकर ही पूरे किए जाते हैं. ऐसे में अचानक लगी रोक ने लोगों की आर्थिक स्थिति को झकझोर कर रख दिया है.
निर्माण कार्यों पर रोक लगने से मजदूरों, राजमिस्त्रियों और छोटे ठेकेदारों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. कई परिवारों के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप पड़ गई हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विकास की योजनाएं जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ स्थानीय लोगों के हितों और उनकी आजीविका की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. प्रभावित इलाकों के लोग अब सरकार के अगले निर्णय का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि जल्द ही कोई संतुलित समाधान निकलेगा.



