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नेत्रदान का संकल्प लेकर एम्स पटना के अधिकारियों ने पेश की मिसाल

फुलवारी शरीफ.
एम्स पटना में नेत्र बैंक के उद्घाटन के बाद संस्थान के शीर्ष अधिकारियों ने स्वयं नेत्रदान का संकल्प लेकर समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया. कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) अनुप कुमार तथा डीन (छात्र कल्याण) प्रो. (डॉ.) रूचि सिन्हा ने नेत्रदान का संकल्प पत्र भरकर यह संदेश दिया कि नेत्रदान मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य है.
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसकी आंखें दो जरूरतमंद लोगों को रोशनी दे सकती हैं. इस पहल से संस्थान में मौजूद चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और छात्रों में भी सकारात्मक संदेश गया है.
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार ने बताया कि संस्थान के वरीय अधिकारियों द्वारा स्वयं आगे आकर संकल्प लेना वास्तव में प्रेरणादायक कदम है. उन्होंने कहा कि जब नेतृत्वकर्ता खुद पहल करते हैं तो समाज पर उसका व्यापक प्रभाव पड़ता है.
डॉ. अमित कुमार ने आम लोगों से भी अपील की कि वे नेत्रदान के प्रति भ्रांतियों को दूर करें और आगे आकर संकल्प लें. उन्होंने कहा कि कॉर्नियल अंधत्व से पीड़ित हजारों मरीज नेत्र प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में रहते हैं और नेत्रदान ही उनके जीवन में उजाला ला सकता है.
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नेत्र बैंक अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है, जहां कॉर्निया के संकलन, संरक्षण और प्रत्यारोपण की समुचित व्यवस्था की गई है. संस्थान का उद्देश्य क्षेत्र में नेत्रदान की दर को बढ़ाना और जरूरतमंद मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराना है.
संस्थान प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी तरह सम्मानजनक और वैज्ञानिक तरीके से की जाती है तथा इससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती है.
एम्स पटना की इस पहल को चिकित्सा जगत में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है. अधिकारियों के इस संकल्प से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के लिए आगे आएंगे और अंधत्व उन्मूलन के अभियान को मजबूती मिलेगी.

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