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फर्जी लुट कांड का 48 घंटे में खुलासा, ट्रक मालिक ही निकला साजिशकर्ता, दो साथी गिरफ्तार

लोन के पैसे चुका नहीं पाने के चलते अपने ट्रक पर लोडेड धान को बेचकर झूठा मुकदमा लूट कांड गौरी चक थाना में दर्ज कराया था

फुलवारी शरीफ. पटना के गौरीचक थाना क्षेत्र में दर्ज डकैती के एक मामले का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर सफल उद्भेदन करते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया है. जांच में सामने आया कि ट्रक लूट की झूठी कहानी रचने वाला कोई और नहीं बल्कि ट्रक का मालिक और चालक खुद ही था. पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरे आरोपी की तलाश जारी है.

पुलिस के अनुसार 20 दिसंबर 2025 को फतुहां थाना से शून्य प्राथमिकी प्राप्त हुई थी. प्राथमिकी में वादी मंटू कुमार, पिता लल्लू प्रसाद, निवासी कोलहर हाजीपुर, थाना फतुहां, जिला पटना ने आरोप लगाया था कि वह धान लोड ट्रक लेकर नेपाल जा रहा था. इसी दौरान गौरीचक थाना क्षेत्र के बीबीपुर गांव के पास अज्ञात बदमाशों ने हथियार के बल पर उसका अपहरण कर लिया, ट्रक व मोबाइल लूट लिया और उसे बख्तियारपुर फोरलेन के किनारे झाड़ी में फेंक दिया.

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मामले की जांच के दौरान पुलिस को वादी मंटू कुमार की भूमिका संदिग्ध लगी. कड़ाई से पूछताछ करने पर मंटू कुमार ने स्वयं घटना को फर्जी मानते हुए स्वीकार किया कि उसने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर पूरी डकैती की कहानी गढ़ी थी.
पुलिस पूछताछ में मंटू कुमार ने बताया कि उसने ट्रक लोन पर ले रखा था और किश्त नहीं चुका पा रहा था. इसी कारण उसने अपने सहयोगी नितीश कुमार के साथ मिलकर योजना बनाई. योजना के तहत धान लोड ट्रक को हिलसा थाना क्षेत्र के एक गोदाम में छिपा दिया गया, जहां रितेश कुमार के माध्यम से किसान बनकर धान को मेसर्स मां लक्ष्मी ट्रेडर्स के गोदाम में बेच दिया गया. इस सौदे से करीब एक लाख दस हजार रुपये प्राप्त हुए, जिसे तीनों ने आपस में बांट लिया.

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पटना सिटी एसपीपूर्वी परिचय कुमार ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में मंटू कुमार और नितीश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है. दोनों आरोपी कोलहर हाजीपुर, थाना फतुहां, जिला पटना के निवासी हैं. तीसरे आरोपी रितेश कुमार की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है.
पुलिस ने आरोपियों के पास से 563 बोरा लूटा गया धान, ट्रक (बीआर 21 6ए 3897), एक वीवो कंपनी का मोबाइल फोन, एक मोटरसाइकिल (बीआर 01 एफएफ 2224) और 29 हजार 550 रुपये नकद बरामद किए हैं.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह पूरा मामला झूठी प्राथमिकी दर्ज कर बीमा या आर्थिक लाभ लेने की साजिश का हिस्सा था. फिलहाल सभी आरोपियों से आगे की पूछताछ की जा रही है और अन्य कड़ियों की जांच की जा रही है.

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