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कई पंचायतों को जोड़ने वाली 10 किलोमीटर लंबी ईसापुर मिशन रोड पूरी तरह बदहाल

सरकारी उदासीनता से लोगों की जिंदगी रोज़ दांव पर.

फुलवारी शरीफ. ( अजीत ) राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ थाना गोलंबर से चुनौती कुआं, गुलिस्तान मोहल्ला होते हुए सीधे ईसापुर मिशन रोड से राय चौक, बहादुरपुर, हिंदूनी, गोणपुरा, आलमपुर गोणपुरा, ढिबड़ा, हसनपुरा, माधोपुर, निहोरा होकर पुनपुन पटना सुरक्षा बांध तक जाने वाली करीब 10 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले एक साल से पूरी तरह जर्जर और खस्ताहाल पड़ी है. ईसापुर मिशन रोड की हालत इतनी भयावह हो चुकी है कि पूरा मार्ग बड़े–बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुका है और हर कदम पर दुर्घटना का खतरा बना रहता है, जबकि इसी सड़क से कई पंचायतों के हजारों ग्रामीण रोजाना पटना की ओर आवाजाही करते हैं. मसौढ़ी और जहानाबाद की ओर से आने वाले भारी वाहन भी यही मुख्य शॉर्टकट मार्ग इस्तेमाल करते हैं, जिससे सड़क और तेजी से टूटकर खतरनाक बन गई है. राय चौक से कुरकुरी तक की करीब एक किलोमीटर की सड़क भी पूरी तरह उखड़ चुकी है और आए दिन वाहन पलटने, बाइक सवारों के घायल होने और कई दुर्घटनाओं में जानें जाने जैसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, फिर भी विभागीय अधिकारियों की नजर अब तक इस महत्वपूर्ण मिशन रोड की मरम्मत की ओर नहीं गई है.

ईसापुर मिशन रोड के दोनों ओर इस्लामिया टीचर ट्रेनिंग बी.एड कॉलेज, तक्षशिला कॉलेज ऑफ एजुकेशन, मौलाना सत्तार मेमोरियल बी.एड कॉलेज, पाटलिपुत्र बी.एड कॉलेज, बीबी आसिया बेगम बी.एड कॉलेज, फातिमा डिग्री एवं बी.एड कॉलेज, डॉक्टर डी. वाई. पाटिल स्कूल, कई आईटीआई संस्थान, लघु औद्योगिक इकाइयाँ, गैस एजेंसियों के गोदाम और आईटीबीपी बिहार–झारखंड हेडक्वार्टर तक स्थित हैं, जहां रोज़ भारी ट्रकों और लोडेड वाहनों की आवाजाही होती है, पर इसके बावजूद ईसापुर मिशन रोड का निर्माण और मरम्मत दोनों ही सरकार की प्राथमिकता से बाहर दिखाई देता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क लाखों लोगों की जीवनरेखा है, लेकिन पिछले एक साल से इसके बदहाल रहने से लोग लगातार मुश्किल में हैं, वाहन टूट रहे हैं, लोग घायल हो रहे हैं और सड़क से गुजरना रोज़ाना खतरा उठाने जैसा हो गया है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि सिर्फ आश्वासन देकर चुप बैठे हैं. सबसे ज्यादा परेशानी साइकिल मोटरसाइकिल चलाने वालों लोगों को हो रहा है.सवारी लेकर जा रहा ऑटो टोटो कई बार पलट जाते हैं कई लोग हादसे का शिकार हो चुके हैं बावजूद लोग जान हथेली पर लेकर इस मार्ग से आना-जाना करते हैं. स्थानीय ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द सरकार इस सड़क का निर्माण कराये.

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