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युवा ही विकसित भारत के भाग्य विधाता : प्रेम कुमार

फुलवारी शरीफ, अजीत. प्रेम यूथ फाउंडेशन द्वारा आयोजित युवा चेतना शिविर में चर्चित गांधीवादी प्रेम कुमार ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और युवा ही विकसित भारत के वास्तविक भाग्यविधाता हैं. उन्होंने कहा कि गांधीजी की बुनियादी शिक्षा की परिकल्पना को जमीन पर उतारकर ही भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बन सकता है. नई शिक्षा नीति 2020 में सुधार तो हुआ है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में अभी बड़े बदलाव की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि हर साल लाखों छात्र डिग्री लेकर निकलते हैं, लेकिन केवल 5 से 10 प्रतिशत को ही नौकरी मिल पाती है. बाकी युवा कम वेतन वाली नौकरियों में संघर्ष करते हैं और असफलता की स्थिति में गलत राह पर भटक जाते हैं. बेरोजगारी और परिवार के दबाव से युवा मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं.

प्रेम कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्नातक छात्रों के लिए इंटर्नशिप अनिवार्य किया जाना छात्रों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण कदम है. इंटर्नशिप में नेतृत्व, व्यक्तित्व विकास, जीवन कौशल, संवाद क्षमता, एनजीओ मैनेजमेंट और स्वरोजगार पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं.

एनजीओ हेल्पलाइन के निदेशक सीए संजय कुमार झा ने कहा कि गरीबी मुक्त भारत के लिए युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना आवश्यक है. बिहार को उपभोक्ता से उत्पादक राज्य बनाना होगा. उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि 5 लाख से 50 लाख तक की परियोजनाओं के लिए ऋण उपलब्ध है, जिसमें शहरी क्षेत्र में 25 और ग्रामीण क्षेत्रों में 35 प्रतिशत अनुदान मिलता है. मांस और शराब को छोड़कर कोई भी उद्योग खोला जा सकता है.

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अंत में उन्होंने युवाओं से जात–पात और धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का आह्वान किया. मौके पर प्रबोध तिवारी, क्वीन रंजन, रवि प्रकाश, ज्योति कुमारी, अंजू कुमारी, सपना कुमारी, इशिता आनंद, प्रियांशु कुमार और आयुषी कुमारी उपस्थित रहे.

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