पटना में रिटेल केमिस्ट्स की बैठक संपन्न, GST बदलाव से व्यापारियों में चिंता
पटना: रविवार को राजधानी पटना स्थित होटल रेड वेलवेट में रिटेल केमिस्ट एसोसिएशन बिहार की कार्यकारिणी बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य भर के दवा विक्रेताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय संगठन AIOCD (All India Organisation of Chemists and Druggists) के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य फोकस फार्मा सेक्टर में लागू की गई संशोधित जीएसटी दरों (GST 2.0) और उसके प्रभाव पर रहा। एसोसिएशन के संयोजक संतोष कुमार ने बताया कि नई दरों के लागू होने के बाद विक्रेताओं को पुरानी दरों पर खरीदे गए दवाओं का स्टॉक अब कम रेट पर बेचना पड़ रहा है, जिससे व्यापार में घाटा हो रहा है। उदाहरण के तौर पर, पहले जिन दवाओं पर 12% जीएसटी लगता था, अब वो 5% के स्लैब में आ गई हैं — यानी 100 रुपये की दवा अब सिर्फ 93 रुपये में बिक रही है।

बैठक में यह फैसला लिया गया कि 22 सितंबर से पूरे बिहार में खुदरा दवा विक्रेता संशोधित MRP के अनुसार ही दवाएं बेचेंगे और ग्राहकों को हर लेनदेन पर बिल दिया जाएगा। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन के महासचिव संजय भदानी, अध्यक्ष शमशेर सिंह, उपाध्यक्ष वरुण कुमार, सचिव कविश खेमका और कोषाध्यक्ष मनोज कुमार ने संयुक्त रूप से सरकार और फार्मा कंपनियों से अपील की कि पुराने स्टॉक पर हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा तत्काल प्रभाव से दी जाए। पदाधिकारियों ने कहा कि जीएसटी दरों में बदलाव को लेकर व्यापारी पूरी तरह सरकार के साथ हैं, लेकिन आर्थिक नुकसान झेलना किसी भी छोटे व्यवसायी के लिए आसान नहीं है।
एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार और संबंधित कंपनियां समय पर उचित कदम नहीं उठाती हैं, तो विक्रेताओं को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। इससे दवा आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो सकती है, जिसका असर आम जनता पर पड़ेगा। बैठक में सभी पदाधिकारियों ने एकमत से सरकार से अनुरोध किया कि वे इस विषय को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान सुनिश्चित करें, ताकि न व्यापार रुके और न ही उपभोक्ताओं को परेशानी हो।



