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बिल्डर के फर्जीवाड़े की न्यायालय में खुली पोल, रुक्मणी बिल्डटेक मामले में कोर्ट की सख्त कार्रवाई

फुलवारी शरीफ. अजीत। संपतचक नगर परिषद क्षेत्र के एकतापुरम (भोगीपुर) स्थित छत्रपति शिवाजी ग्रीन्स परिसर से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में न्यायालय ने एक बार फिर भू-स्वामी नागेश्वर सिंह स्वराज के पक्ष में निर्णायक फैसला सुनाया है. इस फैसले ने वर्षों से न्याय की आस लगाए खरीदारों को राहत दी है और बिल्डर कंपनी मे० रुक्मिणी बिल्डटेक लिमिटेड के कथित फर्जीवाड़े को न्यायिक कटघरे में ला खड़ा किया है.

कोर्ट ने अपने दूसरे आदेश में रुक्मिणी बिल्डटेक लिमिटेड के निदेशकों को नोटिस जारी करते हुए कंपनी के स्वामित्व वाले फ्लैट्स और वाणिज्यिक संपत्तियों को जब्ती की सूची में शामिल किया है. इनमें ब्लॉक नंबर ए, ए/1, बी, बी/1, सी, डी, ई और एफ में स्थित 22 आवासीय फ्लैट और ब्लॉक ए, ए/1 (ग्राउंड फ्लोर) एवं एफ (फर्स्ट फ्लोर) में स्थित 3 वाणिज्यिक इकाइयां शामिल हैं. आदेश के बाद न्यायालय द्वारा अधिकृत अधिकारियों की टीम परिसर में पहुंची और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी. इससे वर्षों से लंबित इस प्रकरण को नई न्यायिक गति मिली है.

दिनांक 2 सितम्बर को हुई सुनवाई के दौरान रुक्मिणी बिल्डटेक लिमिटेड के अधिवक्ता ने कोर्ट से आग्रह किया कि चिन्हित संपत्तियों पर कार्रवाई फिलहाल न की जाए. उन्होंने दावा किया कि पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर बहाल आर्बिट्रेटर पूर्व न्यायाधीश वी.एन. सिन्हा के निर्णयानुसार निर्धारित 22.54 करोड़ रुपये की राशि में से कुछ भुगतान भू-स्वामी को किया जा चुका है. लेकिन जब न्यायालय ने भुगतान का प्रमाण मांगा तो बिल्डर पक्ष कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका. इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे झूठे और अपुष्ट दावों के आधार पर कोई राहत नहीं दी जा सकती और मामले की अगली सुनवाई 15 सितम्बर 2025 निर्धारित कर दी गई.

सुनवाई के दौरान न्यायालय में बड़ी संख्या में फ्लैट खरीदार भी मौजूद थे. खरीदारों ने अदालत के रुख को न्याय और पारदर्शिता की दिशा में साहसिक कदम बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई उन लोगों की जीत है जिन्होंने अपनी जीवन भर की पूंजी और सपने इस परियोजना में लगाए थे।

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न्यायालय का यह हस्तक्षेप न केवल एक भू-स्वामी को न्याय दिलाने का प्रयास है बल्कि सैकड़ों मासूम खरीदारों के अधिकारों की भी सुरक्षा है जो वर्षों से ठगी और अनिश्चितता का शिकार रहे हैं. बिल्डर द्वारा बार-बार किए जा रहे झूठे दावे, अपुष्ट भुगतान और निर्माण में टालमटोल को अब अदालत ने गंभीरता से लिया है और यह कार्रवाई भविष्य में एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है.

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