तकनीक, स्वास्थ्य और समावेशी विकास पर हुआ मंथन
तकनीक, स्वास्थ्य और समावेशी विकास पर आद्री की पैनल चर्चा, विशेषज्ञों ने नवाचार के प्रभावों पर किया मंथन
राजगीर, 28 अक्टूबर। एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (आद्री) की ओर से नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस (आईएएसएसआई) के 25वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। ‘प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और समावेशी विकास : नवाचार से लेकर उसके प्रभाव तक’ विषय पर आयोजित इस सत्र में विशेषज्ञों ने चर्चा की कि आधुनिक तकनीक का लाभ समाज के वंचित और हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक किस प्रकार पहुँचाया जा सकता है।
आद्री के सहायक प्राध्यापक एवं भूस्थानिक वैज्ञानिक डॉ. अर्पण शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस चर्चा में एम्स पटना की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्राध्यापक और एसोसिएट डीन (अनुसंधान) प्रो. मोनिका अनंत, आईआईएम अहमदाबाद के जेएसडब्ल्यू स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी की एसोसिएट प्रोफेसर नम्रता चिनदारकर तथा नॉस्टॅला इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एआई डेटा वैज्ञानिक डॉ. तुषार मुंगले शामिल हुए। डॉ. मुंगले स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता भी रह चुके हैं।
चर्चा में वैज्ञानिक नवाचारों को जमीनी स्तर पर प्रभावी सेवाओं और ठोस परिणामों में बदलने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि वायरलेस तकनीक के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में गर्भस्थ शिशु की निरंतर निगरानी संभव हो सकती है। वहीं, ड्रोन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से स्वास्थ्य सेवाओं में परिवहन और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं को कम किया जा सकता है।
कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में डेटा साइंस और सूचना विज्ञान की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकीमिया के मरीजों की मेंटेनेंस थेरेपी को बेहतर बनाने में ये तकनीकें उपयोगी साबित हो सकती हैं।
इसके अलावा, क्षेत्रीय स्तर पर जलवायु संबंधी जोखिमों का आकलन करने और आर्थिक विकास की स्थिति समझने में भूस्थानिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने बताया कि वीआईआईआरएस सेंसर रात के समय पृथ्वी पर मौजूद रोशनी को दर्ज करता है। इन आंकड़ों का उपयोग आर्थिक गतिविधियों और विकास के संभावित संकेतक के रूप में किया जा सकता है। यह अध्ययन नासा के मॉडरेट रेजोल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोरेडियोमीटर (मोडिस) मिशनों से प्राप्त पर्यावरणीय और भूस्थानिक आंकड़ों का भी पूरक है।
पैनल चर्चा के अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीकी उपलब्धियों का लाभ उन लोगों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुँचाना जरूरी है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एल्गोरिदम आधारित मॉडल मानव विशेषज्ञों का स्थान नहीं ले सकते। बेहतर, नैतिक और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चिकित्सकों और विशेषज्ञों का विवेकपूर्ण निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है।



