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एम्स पटना में “न्यूरोवैस्कुलर अपडेट पटना 2026”, स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज के एडवांस इलाज पर राष्ट्रीय मंथन

फुलवारी शरीफ,
पटना स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज पटना के न्यूरोसर्जरी विभाग द्वारा “न्यूरोवैस्कुलर अपडेट पटना 2026” के तहत एक उच्चस्तरीय एडवांस्ड ट्रेनिंग वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया.
इस कार्यक्रम का आयोजन बिहार न्यूरोसर्जरी सोसाइटी और एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ ईस्टर्न न्यूरोसाइंटिस्ट्स ऑफ इंडिया के सहयोग से किया गया, जिसमें देशभर के विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही.
वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक एंडोवैस्कुलर तकनीकों और सेरेब्रल बाईपास सर्जरी पर चिकित्सकों को प्रशिक्षित करना था.
इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए कुल 105 न्यूरोसर्जनों ने हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के जरिए आधुनिक तकनीकों की बारीकियों को सीखा.
विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह की पहल से बिहार में न्यूरोवैस्कुलर बीमारियों के इलाज की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है.
पारंपरिक सर्जरी की तुलना में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से मृत्यु दर और विकलांगता को काफी हद तक कम किया जा सकता है, जिससे हर साल लाखों मरीजों को फायदा मिल सकता है.
वर्कशॉप के दौरान ब्रेन एन्यूरिज्म, आर्टेरियोवेनस मालफॉर्मेशन, इंट्राक्रेनियल हेमरेज और इस्केमिक स्ट्रोक जैसी जटिल बीमारियों के इलाज की उन्नत प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया गया.
विशेषज्ञों ने इन बीमारियों को वैश्विक स्तर पर मृत्यु और दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक बताया.
न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख और आयोजन सचिव डॉ. विकास चंद्र झा ने कहा कि देश में अभी भी न्यूरोवैस्कुलर उपचार की सुविधाएं बेहद सीमित हैं.
उन्होंने बताया कि पूरे भारत में मात्र 50 के आसपास केंद्रों पर ही यह सुविधा उपलब्ध है, जबकि बिहार में यह संख्या सिर्फ 1 से 2 केंद्रों तक सीमित है.
उन्होंने इस क्षेत्र में सुविधाओं और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या को तेजी से बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
उन्होंने यह भी बताया कि देश में केवल 50–60 न्यूरोसर्जन ही ऐसे हैं जो माइक्रोसर्जिकल और एंडोवैस्कुलर दोनों तकनीकों में दक्ष हैं, जो बढ़ती मरीज संख्या के मुकाबले काफी कम है.
कार्यक्रम के दौरान करीब 100 युवा न्यूरोसर्जनों को मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी, कैरोटिड आर्टरी स्टेंटिंग, एन्यूरिज्म कोइलिंग, एम्बोलाइजेशन और सेरेब्रल बाईपास जैसी जीवनरक्षक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया.
इस अवसर पर डॉ. परितोष पांडे, डॉ. अनीता जगेटिया, डॉ. बतुक दियोरा और डॉ. दीपक सिंह सहित कई नामचीन विशेषज्ञ उपस्थित रहे.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम मरीजों की बेहतर देखभाल और उपचार के परिणामों को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
अन्य विशेषज्ञों ने भी न्यूरोवैस्कुलर देखभाल में नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया.
यह वर्कशॉप न केवल चिकित्सकों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक मंच साबित हुई, बल्कि बिहार में स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज के प्रभावी प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानी जा रही है.

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