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एम्स पटना में अग्नि सुरक्षा, अस्पताल निकासी और आपदा आपूर्ति प्रबंधन पर विशेष विमर्श.

फुलवारी शरीफ. (अजीत)
जब बात अस्पताल की हो तो हर निर्णय के केंद्र में जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि होती है. इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए एम्स पटना के अस्पताल प्रशासन विभाग ने बुधवार को अग्नि सुरक्षा, अस्पताल निकासी योजना एवं आपदा आपूर्ति प्रबंधन विषय पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया. यह कार्यक्रम भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ द्वारा संचालित स्वास्थ्य क्षेत्र आपदा तैयारी कार्यक्रम के अंतर्गत वित्तपोषित था. इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों को किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए सक्षम बनाना है.
अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा और निकासी योजना पर आयोजित विस्तृत व्याख्यान के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय अग्नि सेवा महाविद्यालय के निदेशक नागेश सिंघाने थे. उन्होंने कहा कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि अत्यंत संवेदनशील मानवीय जिम्मेदारी है. गहन चिकित्सा कक्ष, नवजात शिशु इकाई, शल्य कक्ष, ऑक्सीजन आपूर्ति प्रणाली और जटिल विद्युत तंत्र जैसे क्षेत्रों में जोखिम की संभावना अधिक रहती है, इसलिए तैयारी भी उतनी ही सुदृढ़ होनी चाहिए.
उन्होंने बल देते हुए कहा कि अग्नि सुरक्षा को केवल औपचारिक सूची तक सीमित न रखकर संस्थान की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाना होगा. जोखिम क्षेत्रों की पहचान, उपकरणों की नियमित जांच, अग्नि चेतावनी प्रणाली और अग्निशमन यंत्रों की सक्रियता, स्पष्ट आदेश प्रणाली तथा नियमित अभ्यास को उन्होंने जीवन रक्षक उपाय बताया. विशेष रूप से उन्होंने कहा कि अस्पताल की निकासी योजना विभागवार, समयबद्ध और निरंतर अद्यतन होनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो.
कार्यक्रम में आपदा आपूर्ति प्रबंधन पर भी गंभीर चर्चा की गई. ग्रुप कैप्टन डॉ. इन्नायथ कबीर, वायु सेना मुख्यालय, नई दिल्ली ने संसाधनों की पूर्व योजना, आपातकालीन भंडारण, अतिरिक्त शय्या क्षमता, स्पष्ट संचार व्यवस्था और जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण को प्रभावी आपदा प्रबंधन की रीढ़ बताया. उन्होंने कहा कि आपदा के समय समन्वित तैयारी और त्वरित निर्णय ही सबसे बड़ा साधन है.
कार्यक्रम के दौरान बढ़ती आपदा प्रबंधन आवश्यकताओं, विधिक प्रावधानों और आधुनिक आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों पर भी प्रकाश डाला गया. प्रतिभागियों को यह संदेश दिया गया कि नियमित प्रशिक्षण और अभ्यास ही वास्तविक आपदा के समय आत्मविश्वास और दक्षता प्रदान करते हैं.
इस अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक, प्रो. डॉ. अनूप कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा, अधिष्ठाता विद्यार्थी कल्याण, तथा डॉ. सुजीत सिन्हा, पाठ्यक्रम समन्वयक एवं विभागाध्यक्ष, अस्पताल प्रशासन सहित तीन राज्यों के स्वास्थ्य प्रशासक, संकाय सदस्य, रेजिडेंट चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी, अभियंता, सुरक्षा कर्मी और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे.
संवादात्मक सत्र में प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी भूमिकाओं को स्पष्ट किया और व्यावहारिक सुझाव साझा किए.
यह पहल दर्शाती है कि एम्स पटना केवल उपचार का केंद्र नहीं बल्कि एक सुदृढ़, सजग और उत्तरदायी स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण की दिशा में सतत प्रयासरत है, जहाँ सतर्कता संस्कृति है, तैयारी निरंतर है और प्रत्येक जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्रतिबद्धता है.

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