शिक्षण में निखरेगी नई धार, इस्लामिया बी.एड. कॉलेज में दो सप्ताहीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ.
फुलवारी शरीफ, अजीत: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रभावी शिक्षण कौशल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस्लामिया टीचर्स ट्रेनिंग (बी.एड.) कॉलेज, फुलवारी शरीफ, पटना में गुरुवार को दो सप्ताहीय राष्ट्रीय कार्यशाला का विधिवत आगाज़ हुआ.
02 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के शिक्षकों और प्रशिक्षुओं को माइक्रो-टीचिंग के जरिए आधुनिक शिक्षण तकनीकों से रूबरू कराया जाएगा.
कॉलेज के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को कक्षा शिक्षण में अधिक प्रभावी, सृजनात्मक और संवादपरक बनाना है, ताकि छात्र-छात्राओं के सीखने की प्रक्रिया को और अधिक सरल एवं परिणामकारी बनाया जा सके.
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य आर.के. अरुण के स्वागत उद्बोधन से हुआ. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक वातावरण में शिक्षकों के लिए निरंतर प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है और इस प्रकार की कार्यशालाएं उनके कौशल को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं.
मुख्य वक्ता के रूप में मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद के वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक डॉ. जफर इकबाल जैदी ने माइक्रो-टीचिंग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि सूक्ष्म स्तर पर शिक्षण अभ्यास, फीडबैक और आत्ममूल्यांकन के माध्यम से शिक्षक अपनी शिक्षण शैली को बेहतर बना सकते हैं और छात्रों के साथ अधिक प्रभावी संवाद स्थापित कर सकते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि माइक्रो-टीचिंग केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि शिक्षण को वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाने का सशक्त माध्यम है, जो शिक्षकों को उनकी कमजोरियों को पहचानने और उन्हें सुधारने का अवसर देता है.
कार्यशाला के सफल संचालन में आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. अली इमाम और सह-समन्वयक डॉ. मंजुला की महत्वपूर्ण भूमिका रही. वहीं सह-संयोजक के रूप में डॉ. अमिता कुमारी और डॉली शरण ने आयोजन को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में अहम योगदान दिया.
कार्यक्रम का संचालन सादिया और राहुल कुमार ने प्रभावशाली ढंग से किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन रूबी नाज़ ने प्रस्तुत किया.
कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षकगणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे शैक्षणिक वातावरण उत्साह और ऊर्जा से भर गया.
आयोजकों के अनुसार यह कार्यशाला शिक्षकों के लिए एक सशक्त मंच साबित होगी, जहां वे न केवल नई शिक्षण विधियों को सीखेंगे, बल्कि अपने अनुभवों का आदान-प्रदान भी करेंगे और शिक्षण के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देंगे.



