रमजान उल मुबारक का चांद नजर आया, गुरुवार से पहला रोजा.
इबादत, रहमत और बरकत के पवित्र महीने की शुरुआत, मस्जिदों में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़.
फुलवारी शरीफ: (अजीत)इस्लामिक कैलेंडर के सबसे पवित्र महीने रमजान उल मुबारक का चांद बुधवार की शाम देश के विभिन्न हिस्सों में नजर आ गया. चांद दिखने की तस्दीक होते ही गुरुवार से रमजान के मुकद्दस महीने की शुरुआत हो गई और गुरुवार से पहला रोजा रखा जा रहा है.
रमजान माह का मुकद्दस चांद बिहार के गया, नवादा, समस्तीपुर के मुसरी घरारी, दरभंगा तथा झारखंड के रांची, लोहरदगा, चतरा सहित असम और देश के विभिन्न हिस्सों में देखे जाने की सूचना मिलने के बाद बिहार, झारखंड और उड़ीसा के मुसलमानों की सबसे बड़ी एदारा इमारत ए शरिया तथा प्रसिद्ध खानकाह मुजीबिया सहित तमाम मुस्लिम एदारों ने ऐलान किया कि रमजान मुबारक का पहला रोजा गुरुवार से शुरू होगा.
खानकाह मुजीबिया फुलवारी शरीफ के प्रशासक सैयद शाह मिन्हाजुद्दीन कादरी एवं इमारत ए शरिया के काजी मौलाना अंजार आलम कासमी ने चांद नजर आने की पुष्टि करते हुए बताया कि बुधवार को रमजान का चांद दिखाई दे गया है. इसके साथ ही गुरुवार से माह-ए-रमजान का आगाज हो गया है. उन्होंने तमाम मुस्लिम समुदाय से अपील की कि इस पवित्र महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत, तिलावत-ए-कुरआन और जरूरतमंदों की मदद करें. इमारत ए शरिया के नाजिम मौलाना सईदुर रहमान कासमी ने भी मुस्लिम समुदाय को रमजान की मुबारकबाद दी है.
रमजान का महीना रहमत, मगफिरत और जहन्नम से निजात का महीना माना जाता है. इस महीने में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं. रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि अपने अंदर सब्र, परहेजगारी और तकवा पैदा करने का माध्यम है. रमजान इंसान को बुराइयों से दूर रहकर नेकी और इंसानियत की राह पर चलने का पैगाम देता है.

चांद नजर आने के साथ ही मस्जिदों में रौनक बढ़ गई है. तरावीह की नमाज के लिए अकीदतमंद बड़ी संख्या में मस्जिदों का रुख कर रहे हैं. बाजारों में भी देर रात तक चहल-पहल देखी गई. खजूर, फल, सेवइयां और रोजमर्रा के सामान की खरीदारी को लेकर लोगों में खास उत्साह देखा जा रहा है.
उलेमा ने बताया कि रमजान के महीने में एक नेक अमल का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ा दिया जाता है. जकात और फितरा अदा कर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना इस महीने की खास अहमियत है. रमजान इंसान को आत्मशुद्धि, संयम और सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है.
मुस्लिम समाज में रमजान का महीना आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है. इबादतों से गुलजार मस्जिदें, सहरी और इफ्तार की रौनक तथा आपसी भाईचारे का माहौल पूरे वातावरण को पाकीजगी से भर देता है. आज से शुरू हुआ यह पवित्र सफर अल्लाह की रहमतों और बरकतों की दुआओं के साथ आगे बढ़ेगा.



