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मजदूर की मौत पर फूटा गुस्सा, मुआवजा और अंडरपास की मांग को लेकर एनएच पर बवाल, घंटों जाम

अंडरपास निर्माण और मुआवजा के आश्वासन के बाद खुला रास्ता, सैकड़ों वाहन फंसे, लोग परेशान.

फुलवारी शरीफ,
पटना-डोभी फोरलेन पर सिमरा गांव (बिरला नगर के समीप) रविवार की देर शाम हुए भीषण सड़क हादसे के बाद सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. मजदूर पिंटू दास की मौत से आक्रोशित लोगों ने शव को सड़क पर रखकर एनएच को जाम कर दिया और जमकर हंगामा किया. इस दौरान मुआवजा और अंडरपास निर्माण की मांग को लेकर करीब तीन से चार घंटे तक आवागमन पूरी तरह ठप रहा.
जाम के कारण पटना-डोभी-गया मार्ग पर सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन जहां-तहां फंस गए. सड़क पर लंबी कतार लग गई और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. कई लोग घंटों जाम में फंसे रहे, जिससे स्थिति अफरातफरी की बनी रही.
बताया जाता है कि रविवार को दानापुर निवासी युवक की तेज रफ्तार बुलेट मोटरसाइकिल की चपेट में आने से मजदूर पिंटू दास की मौके पर ही मौत हो गई थी. इस हादसे में बाइक चालक की भी जान चली गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है, जिसका इलाज पटना में चल रहा है. घटना के बाद से ही ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त था.
सोमवार को पूर्व विधायक गोपाल रविदास के नेतृत्व में ग्रामीण सड़क पर उतर आए और सिमरा बाइपास के पास शव रखकर जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिमरा, सुईथा पंचायत और परसा क्षेत्र के हजारों लोग इसी सड़क से रोजाना आवागमन करते हैं, लेकिन तेज रफ्तार वाहनों के कारण यहां लगातार हादसे हो रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार अब तक 16 से 17 लोगों की जान जा चुकी है, बावजूद इसके प्रशासन और एनएच प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
प्रदर्शन में भाकपा माले नेता साधु शरण प्रसाद, देवीलाल, लेनन पासवान, भोला चौधरी और हरेंद्र रविदास समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे. लोगों ने मृतक के परिजनों को उचित सरकारी मुआवजा देने और स्थायी समाधान के तौर पर अंडरपास निर्माण की मांग जोरदार तरीके से उठाई.

सूचना मिलते ही परसा बाजार थाना अध्यक्ष मेनका रानी दलबल के साथ मौके पर पहुंचीं. साथ ही प्रखंड विकास पदाधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित किया गया. प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों को पारिवारिक लाभ योजना के तहत 20 हजार रुपये का चेक दिया गया. इसके अलावा कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत 3000 रुपये और एक क्विंटल अनाज देने का आश्वासन दिया गया.
एनएच के कार्यपालक पदाधिकारी ने एक माह के भीतर अंडरपास निर्माण कार्य शुरू कराने का भरोसा दिलाया, जबकि तत्काल सुरक्षा के लिए सड़क पर लोहे के बैरिकेड लगाने की बात कही गई.
करीब तीन से चार घंटे तक चले हंगामे और जाम के बाद प्रशासन के समझाने-बुझाने और आश्वासन पर ग्रामीणों ने जाम समाप्त कर दिया. इसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका. हालांकि इस दौरान हाईवे पर लंबा जाम लगने से आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी.
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द अंडरपास निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ और सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो वे फिर से आंदोलन करने को बाध्य होंगे.

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