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पटना के प्रोफेसर 14 साल से लीबिया में फंसे, पीएम मोदी से लगाई स्वदेश वापसी की गुहार

फुलवारी शरीफ, पटना निवासी प्रोफेसर संजीव धारी सिन्हा पिछले करीब 14 वर्षों से लीबिया में फंसे हुए हैं और अब उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर स्वदेश वापसी तथा न्याय दिलाने की गुहार लगाई है. उन्होंने अपनी पीड़ा सोशल मीडिया के माध्यम से भी साझा की है, जिससे यह मामला सामने आया है.
प्रोफेसर सिन्हा ने अपने पत्र में बताया कि वे वर्ष 2013 में नौकरी के सिलसिले में लीबिया गए थे और वहां दो विश्वविद्यालयों में कार्यरत रहे. उनका आरोप है कि वर्ष 2018-19 से लेकर अब तक उन्हें विभिन्न स्थानों पर बंधक जैसी स्थिति में रखा गया है. वर्तमान में वे एलमरगिब यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड साइंस, मस्ल्लाता में रह रहे हैं, जहां उन्हें न तो उचित वेतन मिला और न ही कानूनी प्रक्रिया के तहत वीजा और अनुबंध की सुविधाएं दी गईं.
उन्होंने कहा कि वे वर्षों से लीबिया के विभिन्न मंत्रालयों, संयुक्त राष्ट्र मिशन, मानवाधिकार संगठनों तथा भारत के विदेश मंत्रालय से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है. उनका आरोप है कि भारतीय दूतावास के कुछ कर्मियों द्वारा मामले को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे उनकी स्थिति और जटिल हो गई है.
प्रोफेसर सिन्हा के अनुसार, उन्हें कई तरह की प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें खराब हालत वाले कमरे में रखा गया, पानी-बिजली जैसी सुविधाएं भी बाधित की गईं और कई बार मारपीट की कोशिश भी हुई. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जबरन शादी करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, ताकि वे वहां स्थायी रूप से रुक जाएं.
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि लीबिया में नौकरी छोड़कर भारत लौटने के लिए उन्हें ‘एग्जिट वीजा’ की आवश्यकता है, जो संबंधित विश्वविद्यालय और अधिकारियों द्वारा नहीं दिया जा रहा है. वहीं, बिना वीजा के वे भारत नहीं लौट सकते, जिससे वे एक तरह से फंसे हुए हैं.
प्रोफेसर सिन्हा ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने अपनी मां (2011) और पिता (2016) को खो दिया, लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की है कि भारतीय दूतावास को निर्देश देकर उनके दस्तावेजों की सही तरीके से जांच कराई जाए और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाया जाए.
उन्होंने विश्वास जताया कि भारत सरकार उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा करेगी और उन्हें इस संकट से बाहर निकालेगी. फिलहाल यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी चिंता और चर्चा का विषय बना हुआ है.

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