पटना एम्स में जूनियर डॉक्टर की खुदकुशी से हड़कंप, परिजनों ने लगाया मानसिक उत्पीड़न का आरोप.
परिजनों के विरोध के चलते एम्स में नहीं हो सका पोस्टमार्टम, शव को भेजा गया पीएमसीएच.
फुलवारीशरीफ, पटना. अजीत। पटना एम्स में कार्यरत जूनियर डॉक्टर यजुवेंद्र साहू की मौत के बाद संस्थान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. डॉक्टर यजुवेंद्र की मौत 19 जुलाई को संदिग्ध हालात में हुई थी. वह एमबीबीएस का छात्र था और हॉस्टल में उसकी लाश पाई गई थी. घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने एम्स प्रबंधन पर सीधा आरोप लगाया है कि वहां मेडिकल छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
मृतक के भाई और अन्य परिजनों का कहना है कि यजुवेंद्र से लगातार 30 से 36 घंटे तक ड्यूटी करवाई जाती थी. उस पर मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा था और वह अंदर ही अंदर टूट चुका था. परिवार का दावा है कि यही तनाव उसकी खुदकुशी की वजह बना।

मौत के बाद भी विवाद थमा नहीं. परिजनों ने एम्स में शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया. उनका स्पष्ट कहना था कि वे एम्स प्रबंधन पर भरोसा नहीं करते और पोस्टमार्टम किसी दूसरे संस्थान में कराया जाए. इसी वजह से तीन दिन तक शव मॉर्च्युरी में रखा रहा. अंततः परिजनों की सहमति के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेजा गया.
इस पूरे मामले में एम्स प्रबंधन ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि संस्थान पोस्टमार्टम कराने को तैयार था, लेकिन परिजनों की असहमति के कारण देरी हुई।

परिजनों ने मांग की है कि यजुवेंद्र की मौत की उच्चस्तरीय जांच हो और एम्स जैसे संस्थानों में डॉक्टर छात्रों के साथ होने वाले व्यवहार की समीक्षा की जाए।फिलहाल, यजुवेंद्र की मौत से एम्स परिसर में शोक और सन्नाटा है. साथी छात्र भी इस खबर से गहरे सदमे में है।



