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जैवविविधता पर मंडरा रहा खतरा, पर्यावरण से छेड़छाड़ के गंभीर परिणाम

— वैज्ञानिकों और समाजसेवियों ने किया आगाह.

फुलवारी शरीफ/पटना.अजीत.
भारतीय प्राणि सर्वेक्षण, गंगा समभूमि प्रादेशिक केंद्र, पटना में आयोजित संगोष्ठी में वैज्ञानिक वी. एम. सतीश कुमार ने जैवविविधता पर बढ़ते संकट को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि पर्यावरण से छेड़छाड़ का सबसे गहरा और बुरा प्रभाव जैवविविधता पर पड़ रहा है. कई दुर्लभ प्राणी तेजी से विलुप्त हो रहे हैं. गौरैया, गिद्ध, चील और कौआ जैसे पक्षियों की संख्या में आई भारी कमी अत्यंत चिंताजनक है. उन्होंने जैवविविधता को बचाने के लिए सामूहिक पहल और संवेदनशीलता अपनाने का आह्वान किया.

कार्यक्रम में प्रेम यूथ फाउंडेशन के संस्थापक एवं गांधीवादी प्रेम जी ने कहा कि हमारे धार्मिक ग्रंथों में चौरासी करोड़ प्राणियों का वर्णन मिलता है, लेकिन वर्तमान समय में यह संख्या घटकर लगभग पंद्रह लाख रह गई है. उन्होंने बताया कि हमारे धर्म और परंपराओं में विभिन्न जीवों को विशेष स्थान देकर संरक्षण का संदेश दिया गया है—जैसे नाग को महादेव के अलंकरण के रूप में, शेर को माता दुर्गा की सवारी के रूप में, और चूहे को भगवान गणेश के वाहन के रूप में दर्शाया गया है.
उन्होंने कहा कि विल्ली (बिल्ली) संरक्षण के लिए भी समाज ने मान्यताएँ बनाई थीं, ताकि जीव-जंतुओं के प्रति दया और संरक्षण की भावना बनी रहे.

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फाउंडेशन के कार्यक्रम अधिकारी रवि प्रकाश ने कहा कि जैवविविधता को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है, क्योंकि जीवन चक्र के संतुलन में प्रत्येक जीव का अपना अनिवार्य योगदान है.

कार्यक्रम में बी.एन. कॉलेज, साइंस कॉलेज पटना, श्री अरविंद महिला महाविद्यालय और गंगा देवी महिला महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. मौके पर जेएसआई के मनीष चंद्र पटेल, सुनीता पात्रा, रजनीश रंजन, राहुल कुमार, इंटर्न आयुषी रानी, अमृतांशु, ज्योति, नेहा, अंजू, अंकिता, सपना, आरती, श्यामली और आयुष मौजूद रहे.

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