चक मूसा की नाबालिग छात्रा मौत मामला: एसआईटी और एफएसएल ने किया सीन री-क्रिएशन, हर एंगल से हो रही जांच
एफएसएल रिपोर्ट के बाद होगी आगे कार्रवाई, जरूरत पड़ने पर आरोपियों का कराया जाएगा नार्को टेस्ट.
फुलवारीशरीफ: फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र के चक मूसा में 11वीं की नाबालिग छात्रा की कोचिंग भवन की सातवीं मंजिल से गिरकर हुई संदिग्ध मौत मामले में जांच तेज कर दी गई है. गुरुवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) और एफएसएल की टीम घटनास्थल पर पहुंची और वैज्ञानिक तरीके से सीन री-क्रिएशन कर घटना की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया.
मौके पर सिटीएसपी पश्चिमी भानुप्रताप, डीएसपी फुलवारी शरीफ सुशील कुमार, थानाध्यक्ष गुलाम शाहबाज आलम, एसआईटी के सदस्य समेत कई पुलिस अधिकारी मौजूद रहे. वहीं पूरी जांच प्रक्रिया की मॉनिटरिंग सिटी एसपी वेस्ट भानु प्रताप सिंह द्वारा की गई.
जांच के दौरान एफएसएल टीम ने छात्रा के वजन के बराबर करीब तीन डमी पुतलों को सातवीं मंजिल से नीचे गिराकर अलग-अलग एंगल से परीक्षण किया. पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि छात्रा किस परिस्थिति में नीचे गिरी, क्या उसे किसी ने धक्का दिया, क्या उसने स्वयं छलांग लगाई या फिर किसी ने ऊपर से फेंका.
सीन री-क्रिएशन के दौरान गिराई गई डमी अलग-अलग दिशाओं में गिरीं. अधिकारियों ने गिरने की दिशा, दूरी और जमीन पर गिरने के स्थान का बारीकी से निरीक्षण किया. घटनास्थल से पहले जुटाए गए साक्ष्यों का मिलान अब वैज्ञानिक परीक्षण के जरिए किया जा रहा है.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया है और हर पहलू की गहन जांच की जा रही है. भवन की संरचना, छत की ऊंचाई, चारदीवारी की स्थिति, छात्रा के शरीर पर मिले चोट के निशान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी तथ्यों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
पुलिस अधीक्षक पश्चिमी के अनुसार एफएसएल की अगली रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर आरोपितों का नार्को टेस्ट भी कराया जा सकता है ताकि घटना की सच्चाई सामने लाई जा सके.
इधर पीड़ित परिवार ने घटना को आत्महत्या मानने से इनकार किया है. परिजनों का आरोप है कि उनकी पुत्री की हत्या कर साजिश के तहत छत से नीचे फेंका गया है. परिवार ने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है.
घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है. पुलिस प्रशासन का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा. जांच एजेंसियों का दावा है कि तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही मौत की असली वजह सामने लाई जाएगी.



