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कड़ाके की ठंड ने पटना की रफ्तार थामी, अलाव बने सहारा, सड़कें सूनी, गरीब-मजदूर सबसे ज्यादा बेहाल

फुलवारी शरीफ .
राजधानी पटना में लगातार बढ़ती ठंड ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. सोमवार को शीतलहरी और ठंडी हवाओं के असर से सुबह से ही सड़कों पर आम दिनों जैसी चहल-पहल नजर नहीं आई. दफ्तर जाने वाले लोग देर से घरों से निकले, जबकि कई जगहों पर दुकानें भी तय समय से देर से खुलीं. ठंड का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा-ऑटो चालकों और फुटपाथ पर जीवन यापन करने वालों पर साफ दिखाई दिया. सुबह से ही शहर के चौक-चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अस्पताल परिसरों के बाहर लोग आग-अलाव के आसपास सिमटे नजर आए. कई इलाकों में लकड़ी और कचरे से जलाए गए अलाव ही लोगों के लिए ठंड से बचाव का एकमात्र सहारा बने रहे. ठंडी हवाओं के कारण लंबे समय तक खुले में खड़े रहना मुश्किल हो गया, जिससे रोज कमाने-खाने वाले लोगों की आय भी प्रभावित हुई.
ठंड और कोहरे के चलते सुबह के समय स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी. कई परिवारों ने छोटे बच्चों को घर से बाहर निकलने से रोका. सड़कों पर कम दृश्यता और ठिठुरन के कारण वाहन चालक भी सतर्क नजर आए, जिससे यातायात की गति धीमी रही. अस्पतालों में सर्दी-खांसी, बुखार और सांस से जुड़ी शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है.
यदि आने वाले दिनों में ठंड का यही हाल बना रहा, तो जनजीवन पर इसका असर और गहरा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक शीतलहरी रहने से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ सकता है. खुले में रहने वाले लोगों के लिए हालात और कठिन हो सकते हैं. ऐसे में प्रशासन और समाजसेवी संगठनों की ओर से अलाव, कंबल और राहत की व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है.
शहरवासी भी ठंड से बचाव के लिए अतिरिक्त कपड़ों, गर्म पेय और आग-अलाव का सहारा ले रहे हैं. हालांकि, बढ़ती ठंड ने यह साफ कर दिया है कि मौसम का यह दौर सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है.

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