एम्स पटना और सी-डैक के बीच समझौता. एआई तकनीक से बदलेगी स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
फुलवारी शरीफ.
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना ने सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया है. यह समझौता नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान हुआ.
इस समझौते का सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा. अब आधुनिक तकनीक की मदद से डॉक्टर मेडिकल रिपोर्ट, एक्स-रे, सीटी स्कैन और जांच रिपोर्ट को तेजी और सटीकता से समझ सकेंगे. इससे बीमारी की पहचान जल्दी होगी और समय पर सही इलाज मिल सकेगा. खासकर कैंसर, गंभीर चोट और अन्य बड़ी बीमारियों की शुरुआती चरण में पहचान करने में मदद मिलेगी.
नई डिजिटल व्यवस्था से अस्पताल में पंजीकरण और अपॉइंटमेंट की प्रक्रिया आसान होगी. मरीजों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. साथ ही मजबूत साइबर सुरक्षा प्रणाली से मरीजों का इलाज संबंधी डाटा पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा.
समझौते के तहत एम्स पटना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एक विशेष केंद्र भी स्थापित किया जाएगा. यह केंद्र डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को नई तकनीक का प्रशिक्षण देगा और क्षेत्र में फैलने वाली बीमारियों पर शोध करेगा. बिहार और झारखंड के मेडिकल कॉलेजों को भी इससे मार्गदर्शन मिलेगा.
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. इससे मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी और इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा.
इस पहल को पूर्वी भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.



