अवधेश प्रीत की याद में रंगकर्मियों ने शोक जताया -सूत्रधार ने उन्हें याद किया
खगौल। बृहस्पतिवार को सूत्रधार ने चर्चित कथाकार पत्रकार अवधेश प्रीत को याद किया। सूत्रधार के महासचिव नवाब आलम ने कहा उनका निधन हृदय विदारक है। उनके जाने से जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, वह केवल साहित्य के पन्नों तक सीमित नहीं है। खगौल और सूत्रधार नाट्य संस्था से उनका संबंध इतना गहरा और आत्मीय रहा है कि उनकी अनुपस्थिति वहाँ के हर कलाकार और कला प्रेमी को कचोटेगी। सूत्रधार के महासचिव नवाब आलम याद करते हुए ग़मगीन होते हुए कहा कि इनके साथ कई दशक साथ बिताए थे।

अवधेश प्रीत शुरुआती दिनों में खगौल ‘सूत्रधार’ नाट्य संस्था से जुड़े और साथ की जान थे, उसकी धड़कन थे। मेरा व्यक्तिगत अनुभव इस बात का साक्षी है कि उनके साथ काम करना, उनके व्यक्तित्व को करीब से जानना बहुत सुखद रहा। सूत्रधार की स्मारिका में उनका आलेख छपना, संस्था के प्रति उनके गहरे समर्पण को दर्शाता है।
कुशाग्र बुद्धि और विनम्र स्वभाव का यह संगम उन्हें विलक्षण बनाता था।
नाटकों के प्रति उनका उत्साह, मंच पर उनका साथ और सम्मान साझा करने के क्षण—ये सभी अमूल्य स्मृतियाँ हैं।
भले ही करियर के कारण उन्हें खगौल पटना जाना पड़ा, पर ‘सूत्रधार’ की डोर उन्होंने कभी नहीं छोड़ी।
अवधेश प्रीत जी ने अपनी लेखनी से सामाजिक विमर्श को एक नई दिशा दी। उनके शब्द न केवल कहानियाँ कहते थे, बल्कि जीवन के गूढ़ सत्यों को भी बड़ी सहजता से उद्घाटित करते थे। उनका जाना एक ऐसे मार्गदर्शक का बिछुड़ना है, जिसकी छाया में कई युवा रचनाकार पल्लवित हुए।
आज जब उनकी भौतिक उपस्थिति हमारे बीच नहीं है, तब उनकी रचनाएँ, उनके विचार और ‘सूत्रधार’ संस्था के साथ बिताए गए उनके अनमोल पल ही हमें संबल देंगे। उनकी स्मृति, संस्था के हर नाटक, हर रिहर्सल और हर मंचन में सदैव गूँजती रहेगी।
साहित्यकार प्रोफेसर प्रसिद्ध यादव ने अवधेश प्रीत को एक ओजस्वी साहित्यकार बताया।उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य की क्षितिज पर अपनी कथाओं और उपन्यासों से एक विशिष्ट पहचान बनाई। उनके निधन से साहित्य जगत के लिए एक अवसान है।
शोक व्यक्त करने वालों में वरिष्ठ रंगकर्मी निर्देशक मो सरूर अली अंसारी, कवि मोइन गिरिडीहवी, अशोक कुणाल,विकास कुमार पप्पू, विनोद शंकर मिश्र, रूपेश कुमार, उदय कुमार, अरुण सिंह पिंटू, अस्तानंद सिंह, शोएब कुरैशी, मो सदीक, सज्जाद आलम, सऊद आलम, जीशान आलम आदि शामिल हैं।



